Anand Mahindra Biography in Hindi, फॅमिली, सम्पति, करियर

Anand Mahindra Biography in Hindi, प्रारंभिक जीवन, करियर, फॅमिली, समाज कार्य, पुरस्कार और संम्मान, Motivational Quotes.

हेल्लो दोस्तों, आज के इस आर्टिकल में आज हम ऐसे शख्स के बारे में जानकारी लेने वाले है जो की हमारे भारत देश के कई योवकों के रोल मॉडल है. जिनके जीवन से हमे बहुत सारी प्रेरणा मिलती है. हमारे देश में ऐसे बहुत से बिज़नस मन है. लेकिन जिन्होंने बहुत ही कम अवधि में अपना बिज़नस सक्सेसफुल बनाया और दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई ऐसे बहुत कम बिजनेसमैन है. उनमे से ही एक नाम है Anand Mahindra. जो की एक भारतीय व्यावसायिक और ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा’ ग्रुप के अध्यक्ष है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप का नाम तो आप में से बहुत लोगों ने सुना होगा. भारत में प्रथम १० बिज़नस ग्रुप में इनका नाम लिया जाता है. यह ग्रुप अलग अलग क्षेत्रो में अपना नाम बना चूका है जैसे की एरोस्पेस, मोटार वाहन, घटक, निर्माण उपकरण, रक्षा, उर्जा, वित्त और बिमा, औद्योगिक उपकरण, कृषि उपकरण, अवकाश और आतिथ्य अदि.

जगदीश चन्द्र महिंद्रा जो की आनंद महिंद्रा के दादाजी थे. उन्होंने अपने भाई केलाश चंद्र महिंद्रा के साथ मिलकर ‘महिंद्रा एंड महिंद्रा’ ग्रुप का निर्माण किया है. बाद में आनंद महिंद्रा ने महिंद्रा एंड महिंद्रा की जिम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई है. उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इस ग्रुप का नाम अपने देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई सारे देश में बनाया है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप को सफल बनाने में आनंदजी का बेहद बड़ा योगदान है. उनके इस कार्य के लिए जनवरी २०२० में उनको को पद्म भूषण पुरस्कार से सन्मानित किया गया है. तो चलिए आज हम उनके जीवन का परिचय करा लेते है.

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आनंद महिंद्रा का प्रारंभिक जीवन (Anand MahindraBiography in Hindi)

Anand Mahindra Biography in Hindi

आनंद महिंद्रा का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई शहर में 1 मई १९५५ को हुआ था. जिस परिवार में उनका जन्म हुआ था वह एक प्रसिद्ध व्यवसायी परिवार था. इनके पिता का नाम हरीश महिंद्रा और माता का नाम इंदिरा महिंद्रा था. Anand Mahindra ने अपनी शुरवाती शिक्षा लॉरेंस स्कूल से की.

बाद में वो पढाई के लिए अमेरिका चले गए और साल १९७७ में उन्होंने अमेरिका के हार्वर्ड कॉलेज कैंब्रिज से ‘डिपार्टमेंट ऑफ़ विज्युल एंड एनवायर्नमेंटल स्टडीज ‘में अपना ग्रेजुएशन किया. इसके बाद साल १९८१ में हार्वर्ड बिज़नस स्कूल, बोस्टन से एमबीए पूरा किया. उसके बाद में उन्होंने अनुराधा महिंद्रा से शादी की. पत्नी अनुराधा जो की विभिन्न पत्रिका जैसे की ‘वर्व’ और ‘मेंस वर्ल्ड’ संपादक है. आनंदजी की 2 बेटीया है. जिनका नाम आलिका महिंद्रा और दिव्या महिंद्रा है.

Anand Mahindra करियर

साल १९८१ में एमबीए की शिक्षा पूरी करने के बाद आनंदजी भारत लौट आए और उन्होंने यहाँ आकार महिंद्रा एंड महिंद्रा के ‘महिंद्रा युजॉइन स्टील कंपनी’ (MUSCO) को वित्त निवेशक के कार्यकरी सहायक के रूप में ज्वाइन कर लिया. साल १९८९ में इन्हें MUSCO के अध्यक्ष और उप प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया. जिसमे इन्हें कंपनी के रियल एस्टेट डेवलपमेंट और हॉस्पिटैलिटी विभाग का कारोबार सोपा गया.

आनंदजी को ४ अप्रैल १९९१ को महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के उप प्रबंध निदेशक की भूमिका दी गई. इनकी अच्छी कामगिरी को देख साल १९९७ में इन्हें महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड के प्रबंध निदेशक और फिर साल २००१ में समूह के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया. साल २०१२ में आनंदजी को महिंद्रा एंड महिंद्रा लिमिटेड और महिंद्रा ग्रुप का अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया.

साल २००२ में आनंदजी के नेतृत्व में ही महिंद्रा मोटर्स ने महिंद्रा स्कार्पियो (scorpio) का लॉन्च किया. जो की महिंद्रा मोटर्स कंपनी की सबसे प्रसिद्ध कार बन चुकी है. महिंद्रा scorpio जो की महिंद्रा की पुराणी कार SUV का ही एक नया मॉडल है जिसे स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है.

इसके साथ साथ कृषि उपकरण बनाने में महिंद्रा ग्रुप सबसे आगे है. ट्रेक्टर बनाने में महिंद्रा ग्रुप दुनिया में सबसे बड़ा निर्माता है. आनंदजी ने कड़ी मेहनत करके महिंद्रा ग्रुप का देश विदेश में नाम बनाया है. महिंद्रा ग्रुप की कुल संपत्ति 19 बिलियन डॉलर है और आज भारत देश के टॉप १० औद्योगिक घरानों में उनका नाम लिया जाता है.

आनंदजी, महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड के सह प्रमोटर भी है, महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड एक फाइनेंस कंपनी है, जिसे आज हम कोटक महिंद्रा बैंक के नाम से जानते है. साल २००३ में उन्होंने महिंद्रा फाइनेंस लिमिटेड को कोटक महिंद्रा बैंक में तब्दील कर दिया. जो की आज भारत के अग्रणी बैंक में अपना स्थान बनाई हुई है. आनंदजी ने अपने कार्यकाल में महिंद्रा ग्रुप का विस्तार विश्वभर में किया.

इनके नेतृत्त्व से ही महिंद्रा ग्रुप ने संग्योंग मोटर्स, रेवा इलेक्ट्रिक कार कंपनी, Aerostaff Australia, Gippsland एरोनॉटिक्स, सत्यम कंप्यूटर सर्विसेस, Peugeot Motorcycle, हॉलिडे क्लब आदि कंपनियों का अधिग्रहण किया.

आनंदजी ने ‘महिंद्रा सिस्टम एंड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजीज ‘की स्थापना की जिससे कंपनी को एक अलग और नए क्षेत्र में पहचान मिल गयी. इन्होने अपने कार्यकुशलता से भारत के साथ साथ पुरे विश्व के कई देशो में महिंद्रा ग्रुप की पहचान बनाई है. महिंद्रा ग्रुप कई देशों को महिंद्रा ट्रेक्टर, बोलेरो, XUV500 और महिंद्रा scorpio जैसे वाहनों का सप्लाय करती है.

आनंद महिंद्रा फॅमिली

आनंद महिंद्रा के दादाजी का नाम जगदीश चन्द्र महिंद्रा था जो की Mahindra and Mahindra के co-Founder थे. इनके पिता का नाम हरीश महिंद्रा था जो की एक जानेमाने उद्योगपति थे. और माता का नाम इंदिरा महिंद्रा था. आनंद महिंद्रा के दो बहेने है राधिका नाथ और अनुजा शर्मा. आनंदजी के बीबी का नाम अनुराधा महिंद्रा है, जो की MEN’S world or Verve मैगजीन्स की एक फेमस एडिटर है. उनकी दो बेटिया है, जिनका नाम आलिका महिंद्रा और दिव्या महिंद्रा है.

Anand Mahindra का समाज कार्य

आनंदजी उन वक्तियों में है, जो की समाज के प्रति हमेशा मदद हेतु देखते है. इन्होने शिक्षा क्षेत्र में सुधर के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है.
अभी कोरोना (covid-१९ ) के समय भी लोगों को ऑक्सीजन प्रोवाइड करने का अच्छा काम किया है. और कई लोगों की मदद की है.

1. नन्ही कलि कार्यक्रम

आनंद महिंद्रा शिक्षा को बेहद महत्वपूर्ण मानते है. इसलिए शिक्षा क्षत्र में बढ़ाव लाने के लिए और शिक्षा से वंचित लडकियों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के लिए इन्होने नन्ही कलि प्रोग्राम की शुरूवात की. आनंदजी द्वारा समाज में सुधार लाने के लिए यह बहुत ही अच्छा कदम है. इस प्रोग्राम के माध्यम से के सी महिंद्रा एजुकेशन ट्रस्ट द्वारा शिक्षा से वंचित लडकियों को शिक्षा प्रदान किया जाता है.

अबतक कई सारी नन्ही कलिया इस प्रोग्राम के माध्यम से शिक्षा हासिल कर चुकी है. छात्रों को व्यावसायिक और उच्च शिक्षा के लिए छात्र वृत्ति प्रदान करता है और साथ साथ एक आजीविका प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलता है. Anand Mahindra ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के हार्वर्ड हुमिनिटी सेण्टर को १० मिलियन डॉलर का दान दिया था.

2. Oxygen on Wheels

covid-19 के हालत में महिंद्रा लोगिस्टिक के द्वारा आनंदजी ने महाराष्ट्र स्टेट में मेडिकल के लिए oxygen cylinder का ट्रान्सफर करने के लिए ५०-७० बोलेरो ट्रक उपलब्ध कराया है. उनके द्वारा महाराष्ट्र राज्य के मुंबई, ठाणे, नाशिक, नागपुर जैसे शहरों में ऑक्सीजन सिलिंडर का ट्रान्सफर किया जा रहा है. Anand Mahindra द्वारा पीड़ित लोगों की मदद के लिए यह बहुत ही अच्छा कदम है. इसके कई सारे लोगों को ऑक्सीजन मिलने में आसानी होगी.

पुरस्कार और संम्मान

जनवरी २०२० में Anand Mahindra को भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण पुरस्कार से सन्मानित किया गया. जो की भारत देश का दुसरे स्थान का नागरी पुरस्कार है.

  • साल २०१६ में दुनिया के टॉप ३० सीईओ के लिस्ट में इनका नाम शामिल किया था.
  • साल २०१६ में ब्लूमबर्ग टीवी इंडिया द्वारा ‘दिस्त्रक्तर पर्सनालिटी ऑफ़ द इयर अवार्ड’ दिया गया.
  • साल २०१६ में इन्टरनेट और मोबाइल एसोसिएशन ऑफ़ india द्वारा ‘ social मीडिया पर्सन ऑफ़ द इयर ‘पुरष्कार प्रदान किया गया.
  • साल २०१४ में हार्वर्ड एलुमनी एसोसिएशन द्वारा हार्वर्ड मैडल से सन्मानित किया गया.
  • साल २०१३ फोर्ब्स india लीडरशिप अवार्ड से सन्मान
  • साल २०१२ में सर्वश्रेष्ठ परिवर्तनकारी लीडर अवार्ड हासिल हुआ.
  • साल २०१२ में यूएस-इंडिया बिज़नस कौंसिल द्वारा ग्लोबल लीडर शिप अवार्ड से सन्मानित किया गया.
  • साल २०११ में बिज़नस लीडर ऑफ़ द इयर अवार्ड प्राप्त हुआ.
  • साल २००९ में ‘Ernst एंड Young Enterpreneur of the year India award’
  • साल २००८ में हार्वर्ड बिज़नस स्कूल द्वारा ‘Alumni Achievement Award’ से सन्मान प्राप्त हुआ.
  • साल २००७ में बिज़नस india द्वारा बिजनेसमैन ऑफ़ द इयर अवार्ड
  • साल २००६ में वर्ष के लिए ‘बिज़नस लीडर अवार्ड ‘ CNBC Asia द्वारा प्राप्त किया.
  • साल २००५ में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन द्वारा ‘नेतृत्व पुरस्कार ‘ हासिल हुआ.
  • साल २००४ में व्यावसायिक क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘राजीव गाँधी पुरस्कार’ प्राप्त हुआ.
  • साल २००४ में इनको फ्रांस द्वारा ” knight of the Merit’ पुरस्कार से सन्मानित किया गया.

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Anand Mahindra Quotes

  1. नेता पीछे या किनारे की ओर नहीं देखते है, इसके बजाय वे आगे देखते है.
  2. आपको हर दिन को एक नई चुनौती के रूप में स्वीकार करना होगा.
  3. जितना अधिक आप सकारात्मक बदलाव लाते है, उतना ही आपके व्यापार मॉडल में वृद्धी होती है.
  4. यदि हम अपने पुराने तौर तरीके नहीं छोड़ते है, तो मेक इन इंडिया सफल नहीं होगा.

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