IPO Grey Market क्या है? पूरी जानकारी |Gray Market in Hindi

यदि आप शेयर मार्किट में रूचि रखते है तो आपको पता ही होगा की हाल ही में कितने सारे IPO आये है. आईपीओ से जुड़े हर न्यूज़ में IPO grey market premium की बात होती रहती है. तो आपके मन में यह बात जरूर आई होगी आखिर ये ग्रे मार्किट क्या है? या फिर आईपीओ लांच होने से पहिले IPO grey market premium क्या होता है?

तो चलो दोस्तों आज के इस टॉपिक में यह जान लेते है.

IPO Grey Market क्या है? (Grey Market kya hai?)

ग्रे मार्किट यह एक ऐसा मार्किट है जिसमे लोग कंपनी का आईपीओ आने से पहिले ही उस कंपनी के शेयर की इनफॉर्मल (अनौपचारिक) तरीके से ट्रेडिंग करते है. यह शेयर की ट्रेडिंग ग्रे मार्किट में तब तक चलती है जब तक उस कंपनी का आईपीओ की लिस्टिंग शेयर मार्किट में नहीं होती. यह टाइम १०/१२ दिन का समय हो सकता है.

वैसे देखा जाय तो ग्रे मार्किट यह पूरी तरह unoffical मार्किट है. जैसे शेयर मार्किट BSE, NSE पर SEBI का नियंत्रण होता है. NSE/ BSE में जो भी कारोबार होते है वो सेबी के रूल्स और रेगुलेशन को फॉलो करके ही होते है. SEBI सभी transaction पर नियंत्रण रखती है. लेकिन ग्रे मार्किट में ऐसे नहीं होता. सेबी के जैसे कोनसे भी गवरमेंट संस्था का इस मार्किट पर कोही नियंत्रन नहीं होता है.

ग्रे मार्किट यह पूरी तरह unoffical होने के कारन यह कोही गवरमेंट के रूल्स और रेगुलेशन से नहीं होते है. इस कारन इस मार्किट में ट्रेडिंग करना थोडा रिस्की हो जाता है. ग्रे मार्किट का कारोबार कुछ लोगो द्वारा म्यूच्यूअल अंडरस्टैंडिंग से ही होता है.

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ग्रे मार्किट काम कैसे करती है?

हमने पाहिले ही देखा की यह मार्किट unoffical मार्किट है इस कारन इस मार्किट में जितने भी ट्रेडिंग होती है वो सब ज़बानी तौर पर (orally) होती है. यह ट्रेडिंग कॉन्ट्रैक्ट्स लिखित स्वरुप से नहीं होते है.

यह मार्किट कुछ गिने चुने शहरों में ही संचालित होते है. जैसे की मुंबई पुणे दिल्ली, अहमदाबाद, सूरत में होता है.
इस मार्किट में ट्रेडिंग कुछ डीलर्स के द्वारा ही होते है. इस डीलर्स का काम यही होता है की वह buyers और sellers मिलाता है. साथ में यह भी सुनिश्चित करता है की buyers और seller अपनी अपनी transaction को पूरा करे.

IPO Grey market premium क्या है? (GMP kya hai?)

आईपीओ ग्रे मार्केट प्रीमियम IPO Grey market premium (GMP) यानि की वो कीमत होती जिसपर आईपीओ शेयर की ट्रेडिंग ग्रे मार्किट में होती है.

ग्रे मार्केट प्रीमियम क्या है? इसे हम एक उधाहरण के सहायता से समजते है,

मान लीजिये की किसी एक x कंपनी का आईपीओ आने वाला है जिसका issue price RS. 1000 रखा गया है.
उस आईपीओ का 1LOT= 15 Shares है. (हमारी मिनिमम इन्वेस्टमेंट रु 15000) यदि इस आईपीओ का ग्रे मार्किट प्रीमियम 400 रु. का चल रहा है मतलभ खरीददार (buyer) उस कंपनी के शेयर को 1400 रूपये (1000 + 400) को खरीदने को राजी है.

यह बात हुयी यदि GMP पॉजिटिव है तो.
लेकिन यदि GMP नेगेटिव चल रह है तो आयए देखते है.

यदि कंपनी x का GMP -400 रूपये डिस्काउंट पर चल रह परन्तु उसका issue price 1000 रु चल रहा है मतलभ लोग उस कंपनी के शेयर को 600 रूपये (1000-400 रु ) में खरीदने को राजी है.

लगभग सभी आईपीओ का ग्रे मार्किट प्रीमियम (GMP) बहुत ही जादा volatile होता है जिसकारण इस मार्किट में निवेश करना रिस्की हो जाता है.

Koshtak Rate क्या है?

किसी भी कंपनी का आईपीओ शेयर मार्किट में लिस्टिंग होने से पहिले ही उस आईपीओ की एप्लीकेशन को ही जिस प्राइस पर BUY / SELL होती है उस प्राइस को Koshtak Rate कहते है.

इसे हम आसन भाषा में समजते है,

अगर कोही buyer आईपीओ में निवेश करने वाले लोगो से आईपीओ की एप्लीकेशन को खरीदने के लिया तैयार है. मान लीजिये की buyer 500 रुपया पर एप्लीकेशन को खरीदने के लिए तैयार है.

यहा पर ध्यान देने वाली बात यह है की शेयर की अल्लोत्मेंट हो या न हो फिरभी buyer आईपीओ एप्लीकेशन खरीदने को तैयार है.

यानि की अल्लोत्मेंट हो या न हो फिरभी आईपीओ की एप्लीकेशन सेल करने वालो को 500 रूपये मिलेंगे ही मिलेगे.

तो आप सोच रहे होंगे की buyer इससे कैसे कमाता है. यहाँ पर buyer प्रोबबिलिटी पर खेलते है. ख़रीदे हुए २० एप्लीकेशन में से ४/५ को भी शेयर की अल्लोत्मेंट मिलती है तो और लिस्टिंग अच्छी होती है तो buyer बहुत अच्छा कमा लेते है.

शेयर की अल्लोत्मेंट होने पर seller को अपने डीमेट अकाउंट के शेयर को buyer को ट्रान्सफर करना होता है नहीं तो प्रॉफिट को शेयर करना होता है. और यदि अल्लोत्मेंट नेगेटिव हो गयी है तो जो loss हुआ है वो buyer को seller को ट्रान्सफर करना होता है. यह Transaction को delars लोग make sure करते है.

Koshtak Rate का कांसेप्ट को समजने पर आपको समाज आया होगा की आईपीओ की एप्लीकेशन seller को तो फिक्स प्रॉफिट मिल ही जाता है. और आईपीओ लिस्टिंग का रिस्क पूरी तरह buyer को ट्रान्सफर किया जाता है.

Grey Market trading के फायदे

  • यदि रिटेल इन्वेस्टर को आईपीओ allotment में शेयर नहीं मिलते तो वो ग्रे मार्किट के जरिये आईपीओ लिस्टिंग होने से पहिले ही उस कंपनी का शेयर खरीद सकते है.
  • इसके अलावा आईपीओ स्टॉक मार्किट में लिस्ट होने से पहिले ही एग्जिट ले सकते है.
  • ग्रे मार्किट ट्रेडिंग यह आईपीओ स्टॉक मार्किट में लिस्ट होने से पहिले की जाती है जिस कारन Underwriters को आईपीओ की वैल्यूएशन की जानकारी मिलती है.
  • लोग आईपीओ स्टॉक मार्किट पर कैसा लिस्टिंग हो सकता है, कितने price पर होगा इसका अंदाजा कर सकते है.
  • ग्रे मार्किट के जरिये Underwriters आईपीओ की मार्किट में डिमांड तथा सप्लाई की जानकारी ले सकते है.

निष्कर्ष (Conclusion):

इस तरह हमने जाना की ग्रे मार्किट क्या है? कैसे यह काम करता है. ग्रे मार्किट प्रीमियम प्राइस आईपीओ लिस्टिंग के लिए कंपनीयो को और निवेशको कैसे फायदे हो सकता है.

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Q1. GMP का full Form क्या है?

GMP का फुल फॉर्म Gray Market Premium है.

Reference:
https://www.nirmalbang.com/knowledge-center/guide-on-grey-market-ipo.html
https://www.indiainfoline.com/article/news-personal-finance/what-is-ipo-grey-market-118051100031_1.html
https://www.investopedia.com/terms/g/graymarket.asp

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