Portfolio क्या है? अपना खुदका पोर्टफोलियो बनाना सीखे…

यदि आप स्टॉक मार्किट, म्यूच्यूअल फंड्स, इन्वेस्टमेंट इनमे रूचि रखते है, तो आपने कही बार लोगो से पोर्टफोलियो इस शब्द को जरूर सुना होगा. हम इस पोस्ट में Portfolio kya hai? (What is portfolio in Hindi), पोर्टफोलियो के प्रकार (Types of Portfolio in Hindi), पोर्टफोलियो बनाना कितना महत्वपूर्ण है यह सब जानेंगे. ताकि आप भी अपना संतुलित प्रॉफिटेबल पोर्टफोलियो बना सके.

आज कल पहिले नहीं इतनी निवेश के प्रति जागरूकता बढ़ गयी है. सभी लोग अपने अच्छे भविष्य के लिए निवेश करना चाहते है. आज के समय लोगो को पहिले से जादा निवेश के विकल्प उपलब्द है जैसे की लिए बहुत शेयर मार्किट, म्यूच्यूअल फण्ड, बांड्स, क्रिप्टोकरेंसी, गोल्ड, रियल एस्टेट आदि.

लेकिन निवेश पर अच्छे रिटर्न्स और साथ ही कम रिस्क होना भी बहुत ही जरूरी है. इसलिए हमको सही निति से पोर्टफोलियो बनाना बहुत जरूरी है.

तो दोस्तों इस पोस्ट में आगे बढ़ने के लिए सबसे पहिले जानते है पोर्टफोलियो क्या है?

Portfolio kya hai? (Portfolio in Hindi)

Portfolio यह स्टॉक्स, बांड्स, कॉमोडिटी, एक्सचेंज एंडेड फंड्स (ETF’s), क्लोज एंडेड फंड्स और कॅश इन सब वित्तीय निवेश का संकलन होता है. आम तौर पर लोग स्टॉक्स, बांड्स और कॅश इनको मिलकर की पोर्टफोलियो बनता है यह समजते है, लेकिन ऐसा नहीं होता पोर्टफोलियो में कही प्रकार की संपति, रियल एस्टेट, कला और निजी संपति का भी समवेश किया जा सकता है.

Portfolio diversification kya hai?

Portfolio diversification का मतलब कुल पूंजी को एक ही वित्त विकल्प में निवेश नहीं करते हुए अलग अलग वित्त विकल्प में सही मात्र में बाँटकर निवेश करना. जिससे Risk और volatility को कम किया जा सके.

पोर्टफोलियो के प्रकार (Types of Portfolio in Hindi)

एक स्मार्ट इन्वेस्टर हमेशा अपनी इन्वेस्टमेंट को अलग अलग जगह (Diversify) रखता है. जिस कारण वो अपने इन्वेस्टमेंट पर कम रिस्क लेते हुए अच्छे रिटर्न्स पा सकता है. यही रिस्क और रिटर्न्स, और भविष्य के लक्ष्य को ध्यान में रखकर निचे दिए इन प्रमुख पांच प्रकार में पोर्टफोलियो का विभाजन होता है.

1. आक्रामक पोर्टफोलियो (Aggressive Portfolio):

इस प्रकार के पोर्टफोलियो जादा रिटर्न्स पर फोकस होते है साथ जिसकारण वो जादा रिस्की भी होते है. मतलब की इस पोर्टफोलियो में जादा तो इन्वेस्टमेंट हाल ही चालू हुए स्टार्टअप और छोटी कंपनी, टेक्नोलॉजी कंपनी या फिर दुसरे कोही और सेक्टर की कंपनी के शेयर में होती है जो की बहुत कम समय में जादा रिटर्न्स दे सकती है. लेकिन यह बहुत रिस्की भी हो सकती है. इस प्रकार के पोर्टफोलियो में रिस्क मैनेजमेंट यह बहुत महत्वपूर्ण पहलु होता है. जिसमे कम नुकसान में अच्छा रिटर्न्स पर काम करना होता है.

2. रक्षात्मक पोर्टफोलियो (Defensive Portfolio):

इस प्रकार के पोर्टफोलियो में डिफेंसिव स्टॉक्स का समावेश होता है. डिफेंसिव स्टॉक्स वो होते है जो जिनकी प्राइस जादा सेंसिटिव नहीं होती यानि मार्किट मूवमेंट का उनपर जादा प्रभाव नहीं होता है. यानि की उनपर ख़राब और अछे दोनों भी समय अच्छा रिटर्न्स देनी की सम्भावना होती है. इसमें जादा तो रोजमर्रा के चीजे बनाने की कंपनी होती है. आम तौर पर अर्थव्यवस्था कितनी भी ख़राब क्यों न हो लेकिन रोजमर्रा की चीजे बनाने वाली कंपनी का बिज़नस ठीक से चालू रहता है. इस में जादा तो कंपनी बोनस के तौर पर शेयर धारको को डिविडेंट भी देती है.

3. आय पोर्टफोलियो (Income Portfolio):

इस प्रकार के पोर्टफोलियो की इन्वेस्टमेंट जादा तो डिविडेंट से आने वाली इनकम पर फोकस होते है. इसमें जादा से जादा डिविडेंट देने वाली कंपनी के शेयर में निवेश किया जाता है. इनमे से कुछ स्टॉक्स तो डिफेंसिव पोर्टफोलियो में भी फिट हो सकते है लेकिन यह मुख्य रूप से अच्छे रिटर्न्स के लिए ही चुने जाते है. इनकम पोर्टफोलियो के डायवर्सिफिकेशन के लिए बहुत से इन्वेस्टर रियल एस्टेट प्रॉपर्टी भी लेते है जो की बादमें वो किराये के रूप में लगातार इनकम दे सकती है.

4. Speculative Portfolio:

Speculative का हिंदी में अर्थ होता है जुआ. स्पेकुलेटिव पोर्टफोलियो के निवेश जुआ से बहुत करीब होता है. इस प्रकार का पोर्टफोलियो अन्य किसी भी प्रकार के पोर्टफोलियो से बहुत जादा रिस्की माना जाता है. क्यों की इसमें बहुत जादा रिस्क लेते हुए बहुत ही कम समय में बहुत जादा प्रॉफिट की अपेक्षा की जाता है. इस प्रकार के पोर्टफोलियो से अच्छे रिटर्न पाने के लिए बहुत अच्छा रिसर्च करना होता है. जादा तो Speculative stock में निवेश के बदले ट्रैड ही किया जाता है. आईपीओ यह भी स्पेकुलेटिव का ही उधाहरण है. वितीय सलाहकार का यह मानना है की इसमें अपनी कुल सम्पति से १० % से जादा का फण्ड इस प्रकार के पोर्टफोलियो में नहीं लगाना चाहिए.

5. Hybrid Portfolio:

Hybrid portfolio बनाने के लिए स्टॉक्स के साथ ही बांड्स, रियल एस्टेट, कॉमोडिटी, इस तरह कही प्रकार में इन्वेस्टमेंट किया जाता है. आम तौर पे इस पोर्टफोलियो में ब्लू चिप स्टॉक्स, अच्छे रेटिंग वाले गवर्मेंट बांड्स या कॉर्पोरेट बांड्स में ही निवेश किया जाता है. hybrid portfolio में स्टॉक्स और बांड्स में सामान मात्र में निवेश किया जाता है जिसके वजेसे रिस्क और रिटर्न का सही संतुलन बन जाता है.

अपना फादेमंद पोर्टफोलियो कैसे बनाये?

हमने पाहिले ही देखा की आपका पोर्टफोलियो तभी फायदेमंद हो सकता है जब आप उसे अछेसे diversify करे और सही से मैनेज करे. तो दीखते है की पोर्टफोलियो diversify कैसे करे?

  1. अपने निवेश को अछेसे फैलाएं:

इक्विटी में निवेश करना अच्छी बात है लेकिन ऐसा नहीं की आप अपनी सभी इन्वेस्टमेंट किसी एक ही कंपनी के शेयर में करे, या किसी एक सेक्टर में ही करे. इसके अलवा भी आपके पास दुसरे भी आप्शन होते है जैस की म्यूच्यूअल फण्ड, गोल्ड, फिक्स्ड डिपाजिट अधि.

मान लीजिये यदि आपने कोही ५-६ स्टॉक्स में ही निवेश किया है और भी आईटी सेक्टर के ही है. यदि मार्किट अच्छा चल नहीं रहा या सरकार की आईटी क्षेत्र के लिए कुछ निति बदलती है, तो इसका परिणाम उस क्षेत्र की सभी कंपनी के स्टॉक्स पर हो सकता है.

यदि आप शेयर मार्किट इक्विटी में भी निवेश करने जा रहे तो अच्छा है की आप अलग अलग कंपनी के साथ ही अलग अलग सेक्टर में निवेश करे. जिसके लिए आपको मार्किट में कही पर्याय उपलब्द है जैस की इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी IT, फार्मासिटिकल, एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, बैंकिंग एंड फाइनेंस, कोन्सुमेर गुड्स अधि.

2. निवेश के अन्य विकल्प तलाशें:

आप निवेश के लिए इक्विटी के साथ साथ दुसरे भी आप्शन तलाश सकते है, जैस की म्यूच्यूअल फण्ड, गोल्ड, क्रिप्टोकरेंसी, रियल एस्टेट, पेंशन प्लान अधि.
ये भी पढ़े: Types of investment in Hindi: निवेश क्या है? और कहा करे?

3. निवेश से कब निकलना है पता करे:

यह बात बहुत महत्वपूर्ण हो जाती जब हमारी कोही इन्वेस्टमेंट लम्बे समय से सही से परफॉर्म नहीं कर रही. और उसकी फंडामेंटल कुछ बुरा बदलाव हुवा है तो रिस्क का दयां रखते आपको उस निवेश बाहर निकलना ही अच्छा है.

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का महत्व:

पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का प्रमुख संकल्प यही है की diversification इसका सीधा अर्थ यह है की सभी अंडे एक बास्केट में नहीं रखना चाहिए. diversification में जोखिम को कम करने का प्रयास करते है जिसके लिए विभन्न वित्तीय साधनों, उद्योगों, सेक्टर, में निवेश को बाटकर करते है.

पोर्टफोलियो में जिस भी वित्तीय साधनों में निवेश किया है उनको एक जगह पर ट्रैक करने की कोशिश की जाती है. जिस कारण रिस्क कम करने में मदत होती है. साथ ही पोर्टफोलियो का रिटर्न्स बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है.

निचे कुछ पॉइंट्स दिए है जिस कारण पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का महत्व बढ़ता है….

  • अधिक रिटर्न्स के लिए फंड्स का विनियोजन
  • जोखिम को कम करना
  • विविधता (Diversification)
  • टैक्स प्लानिंग

निष्कर्ष (Conclusion):

इस तरह हमने इस पोस्ट में देखा की Portfolio kya hai? (Portfolio in hindi) और इसके प्रकार, साथ ही अपना पोर्टफोलियो बनाना और मैनेज करना कितना महत्वपूर्ण है या समजा. यदि आपके मन में इस पोस्ट के प्रति कुछ भी सवाल हो तो कमेंट बॉक्स जरूर पूछे, साथ ही यह पोस्ट अपने दोस्तों को जरूर शेयर करे.

ये भी पढ़े:
Assets और liabilities क्या है?
पैनी स्टॉक्स क्या होते है? (What is Penny Stock in Hindi)
Passive Income Ideas List 2021: पैसिव इनकम क्या है कैसे करे?

References:

https://www.investopedia.com/terms/p/portfolio.asp
https://en.wikipedia.org/wiki/Portfolio_management
https://www.edelweiss.in/investology/introduction-to-investing-c6eaf4/what-is-portfolio-diversification-b13fdc

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