Positional Trading क्या है? – Positional Trading in Hindi

Positional Trading in Hindi: यदि आपकी शेयर मार्किट रूचि है तो आपने Intraday trading, Swing Trading, Positional Trading (PT) इस तरह अपने ट्रेडिंग के प्रकार के नाम सुने ही होंगे. आपके मन यह सवाल जरूर होगा आखिर यह Positional Trading kya hai? इसे कैसे करे और मार्किट से प्रॉफिट कमाए? यह सभी हम इस पोस्ट जानेगे.

Positional trading kya hai? / What is positional trading in Hindi

Position Trading (PT) शेयर मार्किट की एक ऐसी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी है जिसमे ट्रेडर शेयर को कुछ दिनों से लेकर एक साल तक होल्ड करते है और शेयर की प्राइस बढ़ाने का इंतजार करते है. और शेयर अच्छा प्रॉफिट में आने के बाद बेच देते है.

पोजीशन ट्रेडिंग यह एक लंबी अवधि / Long Term Trading को संदर्भित करता है.
पोजीशन ट्रेडर शोर्ट टर्म में होने वाले प्राइस के उतार-चढ़ाव से जादा Primary price trend पर जादा ध्यान देते है.

पोजीशन ट्रेडिंग में लोग कम प्राइस में अच्छे कंपनी के शेयर कुछ दिनों से लेकर एक साल तक खरीदकर रखते है और जैसे ही शेयर की प्राइस में उछाल आये तो बेच कर प्रॉफिट बुक करते है.

कब करते है पोजीशन ट्रेडिंग?

पोजीशन ट्रेडिंग यह बहुत सोच समज कर की जाती है. जिसके लिए ट्रेडर फंडामेंटल स्टडी के साथ टेक्निकल एनालिसिस का सहारा लेते है. और सही टाइम पर ट्रैड करते है. हम पोजीशन ट्रेडिंग कब कर सकते है जिसे निचे दिए गए है…

  1. Technical analysis
  2. Corporate Actions
  3. Special Event

Positional Trading Rules:

यदि आप पोजीशन ट्रेडिंग करते वक़्त कुछ बातो को ध्यान में रखकर करोंगे तो रिस्क को कम किया जा सकता है. इसके लिए मैंने आपके लिए कुछ गोल्डन रूल्स बताये है, जिनका आपको पालन करना है, यदि आप इन नियमो का पालन नहीं करेंगे तो आपकी ट्रेडिंग रिस्की हो सकती है.

  1. Fundamentally strong: position trading करने के लिए आपको सिर्फ और सिर्फ Fundamentally मजबूत स्टॉक्स को ही चुनना है.
  2. Suitable for long term investment: आपको पोजीशन ट्रेडिंग के लिए ऐसे स्टॉक्स चुनना है जो की वर्त्तमान में भी (२-३ साल के बाद) अच्छा प्रदर्शन कर सके.

Fundamentally मजबूत और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट के लिए सूटेबल स्टॉक्स हम इस लिए चुनेगे क्यू की यह स्टॉक्स ख़राब समय में जादा गिरते नहीं है. और यदि गिरे भी तो हम अपना कैपिटल लॉन्ग टर्म के लिए वैसे ही रखकर प्रॉफिट में आने का इंतजार कर सकते है. जिससे होने वाले loss से बचा जा सकता है.

पोजीशन ट्रेडिंग कैसे करे?

1) पोजीशन ट्रेडिंग करने से सबसे पहिले आपको ऊपर दिए नियमो का पालन करना है.
२) उधाहरण के तौर पे हम एक स्टॉक ले सकते है. जिसकी प्राइस २००० रू है. और जो की fundamentally बहुत स्ट्रोंग स्टॉक है. लेकिन कुछ कारन के वजेसे प्राइस कम होती है और आपको लगता है की वो कुछ टाइम बाद फिरसे उसकी प्राइस बढ़ सकती है.

तो आप हर ५० या १०० रु के गैप पर यानि
२००० रु – १० शेयर्स
१९०० रु – १० शेयर्स
१८०० रु – १० शेयर्स
१७०० रु – १० शेयर्स
१६०० रु – १० शेयर्स
ऐसे करके आप हर लो पर थोड़ी थोड़ी शेयर्स की क्वांटिटी खरीद सकते है. जिससे आपकी कुल ५० शेयर की एवरेज प्राइस १८०० रु होगी.

इसके बाद आपको इन शेयर की प्राइस बढ़ने का इंतजार करना है. शेयर के प्राइस में उचल आने के बाद आपको सभी शेयर बेचना है. मान लीजिये यदि शेयर की प्राइस कुछ दिन बाद २१०० भी होती है तो आपको पर शेयर ३०० रु का प्रॉफिट मिल सकता है. यानि ५० * ३०० रु = १५००० रु प्रॉफिट आपको हो सकता है.

Advatages & Risk of Positional trading in Hindi

Position Trading ke fayde / Benefits of Position trading:

Less stress: दुसरे ट्रेडिंग प्रकार के मुकाबले पोजीशन ट्रेडिंग में ट्रेडर्स को कम स्ट्रेस का सामना करना होता है. Day trader और scalpers जो कुछ ट्रेड करते है वो बहुत ही जादा रिस्की होता है. मार्किट के फ्लक्चुएशन से उनकी प्रॉफिट के साथ साथ कैपिटल का भी नुकसान हो सकता है. लेकिन ये समस्या पोजीशन ट्रेडिंग में नहीं होता है.

Immune to market fluctuations in a short time: Intraday trading में ट्रेडर को ट्रैड को एक दिन में समाप्त करना होता है, जिससे मार्किट में होने वाले एक दिन के फ्लक्चुएशन से प्रॉफिट और लोस पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है. लेकिन पोजीशन ट्रेडिंग थोड़े जादा लम्बे अवधि के लिए किया जाता है जिससे प्राइस में होने वाले एक दिन के छोटे उतार चदाव का प्रॉफिट loss पर जादा असर नहीं होता है.

Position Trading ke Nuksan / Risk in Position Trading in Hindi:

Overnight Position:
पोजीशन ट्रेडिंग में सबसे बड़ा रिस्क यह है की ट्रेड को लम्बे समय के लिए रखा जाता है. उस समय के बिच कोही नेगेटिव न्यूज़ मार्किट में आती है तो ट्रैड पर बुरा असर हो सकता है.

No Leverage:
पोजीशन ट्रेडिंग कुछ दिनों से लेके एक साल तक के समय में की जाती है, जिस कारन day ट्रेडर के तरह ब्रोकर पोजीशन ट्रेडर को leavrage नहीं देते है. जिसकारण पोजीशन ट्रेडिंग में ट्रेडर के पास जितना कैपिटल है उसपर ही उसे ट्रैड करना पड़ता है.

निष्कर्ष (Conclusion):

उम्मीद करता हु दोस्तों आपको यह Postional trading kya hai? / What is positional trading in Hindi यह पोस्ट से अपना बहुत कुछ सिखा होगा. यदि आपके मन में इस पोस्ट के प्रति कुछ सवाल हो तो कमेंट करके जरूर पूछे. साथ ही यह पोस्ट अपने दोस्तों को भी शेयर करे.

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